🇮🇳 परिचय
भारत गणराज्य के राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। यह पद भारत के सर्वोच्च नागरिक पद में से एक है। 1950 में संविधान लागू होने के बाद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने। राष्ट्रपति न केवल कार्यपालिका के नाममात्र प्रमुख होते हैं, बल्कि वे भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं। आइए जानते हैं अब तक के सभी राष्ट्रपतियों के नाम, कार्यकाल और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ।
📋 भारत के सभी राष्ट्रपतियों की सूची
| क्रम |
नाम |
कार्यकाल |
टिप्पणी |
| 1 |
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद |
1950–1962 |
भारत के पहले और सबसे लंबे समय तक रहने वाले राष्ट्रपति |
| 2 |
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन |
1962–1967 |
महान शिक्षाविद और दार्शनिक |
| 3 |
डॉ. जाकिर हुसैन |
1967–1969 |
पहले मुस्लिम राष्ट्रपति (पद पर मृत्यु) |
| 4 |
वी. वी. गिरी |
1969–1974 |
कार्यवाहक से नियमित राष्ट्रपति बने |
| 5 |
फखरुद्दीन अली अहमद |
1974–1977 |
आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति (पद पर मृत्यु) |
| 6 |
नीलम संजीव रेड्डी |
1977–1982 |
निर्विरोध चुने गए एकमात्र राष्ट्रपति |
| 7 |
ज्ञानी जैल सिंह |
1982–1987 |
पहले सिख राष्ट्रपति |
| 8 |
आर. वेंकटरमन |
1987–1992 |
स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व रक्षा मंत्री |
| 9 |
डॉ. शंकर दयाल शर्मा |
1992–1997 |
पूर्व उपराष्ट्रपति और भोपाल राज्य के सीएम |
| 10 |
के. आर. नारायणन |
1997–2002 |
दलित समुदाय से पहले राष्ट्रपति |
| 11 |
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम |
2002–2007 |
मिसाइल मैन, 'जनता के राष्ट्रपति' |
| 12 |
प्रतिभा पाटिल |
2007–2012 |
भारत की पहली महिला राष्ट्रपति |
| 13 |
प्रणब मुखर्जी |
2012–2017 |
भारत रत्न से सम्मानित |
| 14 |
राम नाथ कोविंद |
2017–2022 |
दूसरे दलित राष्ट्रपति |
| 15 |
द्रौपदी मुर्मू |
2022–वर्तमान |
आदिवासी समुदाय से पहली राष्ट्रपति |
1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (1950–1962)
"सादा जीवन, उच्च विचार" के प्रतीक और भारत के एकमात्र राष्ट्रपति जिन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए।
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➤ सबसे लंबा कार्यकाल:
ये अब तक के एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्हें दो बार (1952 और 1957 में) निर्वाचित किया गया। इनका कार्यकाल 12 वर्षों (1950-62) का रहा, जो एक रिकॉर्ड है।
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➤ संविधान निर्माता:
राष्ट्रपति बनने से पहले वे संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे। भारत के संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले वे प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे।
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➤ प्रमुख उपाधियाँ:
महात्मा गांधी ने उन्हें उनके त्याग और समर्पण के कारण 'देशरत्न' और 'अजातशत्रु' (जिसका कोई शत्रु न हो) की उपाधि दी थी।
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➤ साहित्यिक योगदान:
वे एक महान लेखक भी थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'इंडिया डिवाइडेड' (India Divided) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जाती है।
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➤ सर्वोच्च सम्मान:
वर्ष 1962 में राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया।
2. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1962–1967)
"पूरी दुनिया एक विद्यालय है" — भारत के 'दार्शनिक राष्ट्रपति' (Philosopher President) जिन्होंने भारतीय दर्शन को विश्व पटल पर रखा।
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➤ शिक्षक दिवस का जन्म:
इनका जन्मदिन (5 सितंबर) भारत में 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है। जब छात्रों ने इनका जन्मदिन मनाना चाहा, तो उन्होंने कहा कि मेरा जन्मदिन शिक्षकों को समर्पित किया जाए।
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➤ पहले उपराष्ट्रपति:
राष्ट्रपति बनने से पहले वे 1952 से 1962 तक (लगातार दो कार्यकाल) भारत के पहले उपराष्ट्रपति रहे। राज्यसभा के सभापति के रूप में उनका संचालन आज भी एक मिसाल है।
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➤ पहले ही मिल गया भारत रत्न:
यह एक बहुत रोचक तथ्य है कि उन्हें राष्ट्रपति बनने (1962) से बहुत पहले ही 1954 में 'भारत रत्न' (भारत का पहला भारत रत्न सम्मान) मिल चुका था।
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➤ दो युद्धों के गवाह:
इनका कार्यकाल भारत के लिए बहुत कठिन था। इन्हीं के समय भारत ने दो बड़े युद्ध देखे— 1962 का भारत-चीन युद्ध और 1965 का भारत-पाक युद्ध। इसी दौरान दो प्रधानमंत्रियों (नेहरू और शास्त्री) का निधन भी हुआ।
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➤ वेतन लेने से इनकार:
राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने स्वेच्छा से घोषणा की कि वे अपने वेतन का केवल 25% हिस्सा ही लेंगे और बाकी प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर देंगे।
3. डॉ. जाकिर हुसैन (1967–1969)
"पूरा भारत मेरा घर है और इसके लोग मेरा परिवार हैं" — शपथ ग्रहण के दौरान कहे गए उनके ये शब्द उनकी राष्ट्रभक्ति की मिसाल हैं।
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➤ पहले मुस्लिम राष्ट्रपति:
डॉ. जाकिर हुसैन भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति बने। उनका निर्वाचन भारतीय लोकतंत्र की धर्मनिरपेक्षता का एक बड़ा उदाहरण था।
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➤ पद पर रहते हुए मृत्यु:
यह एक दुखद रिकॉर्ड है कि वे भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिनका निधन कार्यकाल के दौरान (Office में) ही हो गया।
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➤ सबसे छोटा कार्यकाल:
असामयिक मृत्यु के कारण, उनका कार्यकाल अब तक के सभी पूर्णकालिक राष्ट्रपतियों में सबसे छोटा (मात्र 2 वर्ष) रहा है।
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➤ शिक्षा में योगदान:
वे केवल राजनीतिज्ञ नहीं थे, बल्कि जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के सह-संस्थापक और लंबे समय तक इसके कुलपति (VC) भी रहे।
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➤ बिहार कनेक्शन:
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बनने से पहले, उन्होंने 1957 से 1962 तक बिहार के राज्यपाल के रूप में भी सेवा दी थी। उन्हें भी 1963 में 'भारत रत्न' मिला था।
4. वी. वी. गिरी (1969–1974)
"अंतरात्मा की आवाज" — वह नारा जिसने भारतीय राजनीति का रुख मोड़ दिया और एक निर्दलीय उम्मीदवार को देश का राष्ट्रपति बना दिया।
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➤ द्वितीय चक्र की मतगणना:
भारतीय इतिहास में एकमात्र राष्ट्रपति जिनके चुनाव में स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण 'दूसरे दौर' (Second Preference) की वोटों की गिनती करनी पड़ी थी।
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➤ निर्दलीय जीत:
वे अब तक के अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो किसी पार्टी के टिकट पर नहीं, बल्कि निर्दलीय (Independent) उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने।
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➤ कार्यवाहक से इस्तीफा:
डॉ. जाकिर हुसैन की मृत्यु के बाद वे 'कार्यवाहक राष्ट्रपति' बने थे, लेकिन राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
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➤ श्रमिक नेता:
राष्ट्रपति बनने से पहले वे एक प्रसिद्ध मजदूर नेता (Trade Unionist) थे। वे 'अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस' (AITUC) के दो बार अध्यक्ष भी रहे।
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➤ सुप्रीम कोर्ट में पेशी:
वे ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हें अपने चुनाव से संबंधित विवाद में गवाही देने के लिए स्वयं सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा था।
5. फखरुद्दीन अली अहमद (1974–1977)
इतिहास इन्हें उस राष्ट्रपति के रूप में याद रखता है जिन्होंने प्रधानमंत्री की सलाह पर देश में 'आपातकाल' के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
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➤ आपातकाल की घोषणा:
इनका सबसे चर्चित कार्य 25 जून 1975 को राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) की घोषणा पर हस्ताक्षर करना था। यह भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय माना जाता है।
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➤ पद पर रहते हुए निधन:
डॉ. जाकिर हुसैन के बाद ये दूसरे ऐसे राष्ट्रपति थे जिनका निधन उनके कार्यकाल के दौरान (1977 में) ही हो गया। इनकी मृत्यु हृदय गति रुकने से हुई थी।
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➤ सर्वाधिक अध्यादेश:
इनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा अध्यादेश (Ordinances) जारी किए गए थे। आपातकाल के दौरान संसद के स्थगित रहने पर शासन चलाने के लिए इसका खूब उपयोग हुआ।
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➤ आंतरिक अशांति:
इन्होंने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) के आधार पर आपातकाल लगाया था। बाद में संविधान संशोधन द्वारा इस शब्द को हटाकर 'सशस्त्र विद्रोह' कर दिया गया।
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➤ असम कनेक्शन:
ये असम राज्य से आने वाले पहले राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पहले वे केंद्र सरकार में खाद्य एवं कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
6. नीलम संजीव रेड्डी (1977–1982)
"हार से जीत तक का सफर" — एक बार चुनाव हारने के बाद, अगली बार निर्विरोध जीतकर इतिहास रचने वाले राष्ट्रपति।
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➤ निर्विरोध निर्वाचन:
ये भारत के अब तक के एकमात्र राष्ट्रपति हैं जो 'निर्विरोध' (Unopposed) चुने गए। 1977 के चुनाव में अन्य सभी उम्मीदवारों का नामांकन रद्द हो गया था, और इन्हें विजेता घोषित कर दिया गया।
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➤ स्पीकर से राष्ट्रपति:
ये एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जो लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) के पद से सीधे राष्ट्रपति बने। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए दो बार स्पीकर पद से इस्तीफा दिया।
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➤ सबसे युवा राष्ट्रपति (तत्कालीन):
जब ये 1977 में राष्ट्रपति बने, तब इनकी उम्र 64 वर्ष थी, जो उस समय सबसे कम उम्र में राष्ट्रपति बनने का रिकॉर्ड था। (बाद में 2022 में द्रौपदी मुर्मू ने यह रिकॉर्ड तोड़ा)।
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➤ 1969 की हार का बदला:
रोचक तथ्य यह है कि 1969 में ये कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार थे, लेकिन वी. वी. गिरी से चुनाव हार गए थे। बाद में 1977 में जनता पार्टी ने इन्हें उम्मीदवार बनाया और ये जीत गए।
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➤ पहले मुख्यमंत्री:
राष्ट्रपति बनने से पहले इनका प्रशासनिक अनुभव बहुत गहरा था। वे आंध्र प्रदेश राज्य के पहले मुख्यमंत्री भी रहे थे।
7. ज्ञानी जैल सिंह (1982–1987)
एक साधारण पृष्ठभूमि से उठकर राष्ट्रपति भवन तक पहुँचने वाले पहले सिख, जिनका कार्यकाल तूफानी राजनीतिक घटनाओं का गवाह बना।
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➤ पहले सिख राष्ट्रपति:
वे भारत के पहले सिख राष्ट्रपति थे। उनके नाम में 'ज्ञानी' शब्द इसलिए जुड़ा था क्योंकि वे सिख धर्मग्रंथों के जानकार और विद्वान थे।
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➤ जेबी वीटो (Pocket Veto) का प्रयोग:
वे पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक, 1986 पर 'पॉकेट वीटो' का इस्तेमाल किया। उन्होंने न तो बिल पर हस्ताक्षर किए और न ही उसे वापस लौटाया, बस उसे अपने पास रख लिया, जिससे वह कानून नहीं बन सका।
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➤ सबसे कठिन दौर:
उनका कार्यकाल बहुत अशांत रहा। इन्हीं के समय में ऑपरेशन ब्लू स्टार (स्वर्ण मंदिर में सेना का प्रवेश), प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद 1984 के सिख विरोधी दंगे हुए।
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➤ पंजाब के मुख्यमंत्री:
राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्री बनने से पहले, वे 1972 से 1977 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने पंजाब के विकास और हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाई थी।
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➤ स्वतंत्रता सेनानी:
कम उम्र में ही वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ 'प्रजा मंडल आंदोलन' में सक्रिय भाग लिया और कई बार जेल भी गए।
8. आर. वेंकटरमन (1987–1992)
एक परिपक्व राजनेता जिन्होंने राजनीतिक अस्थिरता के दौर में राष्ट्रपति भवन से देश को दिशा दिखाई और गठबंधन युग की शुरुआत देखी।
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➤ 4 प्रधानमंत्रियों का दौर:
इनका कार्यकाल इस बात के लिए प्रसिद्ध है कि इन्होंने 5 साल में 4 अलग-अलग प्रधानमंत्रियों (राजीव गांधी, वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर और पी.वी. नरसिम्हा राव) के साथ काम किया और उन्हें शपथ दिलाई।
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➤ त्रिशंकु संसद (Hung Parliament):
ये पहले राष्ट्रपति थे जिन्हें स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति (त्रिशंकु संसद) का सामना करना पड़ा। उन्होंने सरकार बनाने के लिए 'सबसे बड़े दल' को आमंत्रित करने की परंपरा स्थापित की।
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➤ प्रसिद्ध पुस्तक:
राष्ट्रपति भवन में अपने अनुभवों पर उन्होंने "My Presidential Years" नामक एक बेहद चर्चित पुस्तक लिखी, जिसमें उस दौर की राजनीति का सजीव वर्णन है।
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➤ स्वतंत्रता सेनानी:
ये एक सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे। 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लेने के कारण उन्हें ब्रिटिश सरकार ने दो साल के लिए जेल में डाल दिया था।
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➤ औद्योगीकरण के जनक:
तमिलनाडु के उद्योग मंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य में औद्योगिक क्रांति की नींव रखी थी, इसलिए उन्हें अक्सर 'तमिलनाडु के औद्योगीकरण का वास्तुकार' भी कहा जाता है।
9. डॉ. शंकर दयाल शर्मा (1992–1997)
एक महान विद्वान और अनुभवी राजनेता, जिन्होंने कानून के शिक्षक से लेकर देश के राष्ट्रपति तक का सफर तय किया।
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➤ 4 प्रधानमंत्री देखे:
आर. वेंकटरमन की तरह इन्होंने भी अपने 5 साल के कार्यकाल में 4 प्रधानमंत्रियों (पी.वी. नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी, एच.डी. देवेगौड़ा और आई.के. गुजराल) को शपथ दिलाई। यह गठबंधन सरकारों का दौर था।
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➤ भोपाल राज्य के सीएम:
यह प्रश्न बहुत पूछा जाता है— ये 1952 से 1956 तक तत्कालीन भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री रहे (जब भोपाल अलग राज्य था, मध्य प्रदेश में विलय से पहले)।
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➤ बाबरी मस्जिद विध्वंस:
इनका कार्यकाल इतिहास की एक बड़ी घटना का गवाह बना— 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस इन्हीं के कार्यकाल के दौरान हुआ था, जिससे देश की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई।
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➤ उच्च शिक्षा और कैम्ब्रिज:
वे भारत के सबसे शिक्षित राष्ट्रपतियों में से एक थे। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून में पीएचडी की थी और वहां अध्यापन (Teaching) भी किया था।
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➤ तीन राज्यों के राज्यपाल:
उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति बनने से पहले, उन्होंने आंध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र— तीन राज्यों के राज्यपाल (Governor) के रूप में कार्य किया था।
10. के. आर. नारायणन (1997–2002)
"फूस की झोपड़ी से राष्ट्रपति भवन तक" — भारत के पहले दलित राष्ट्रपति जिन्होंने साबित किया कि वे 'रबर स्टैम्प' नहीं हैं।
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➤ पहले दलित राष्ट्रपति:
यह भारतीय लोकतंत्र की एक ऐतिहासिक घटना थी जब एक दलित समुदाय के व्यक्ति को देश के सर्वोच्च पद पर चुना गया। यह सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम था।
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➤ वर्किंग प्रेसिडेंट (Working President):
उन्होंने खुद को 'रबर स्टैम्प' बनने से इंकार कर दिया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत उत्तर प्रदेश और बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की कैबिनेट की सिफारिश को पुनर्विचार के लिए वापस लौटा दिया था, जो एक बड़ी मिसाल बनी।
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➤ कूटनीतिज्ञ (Diplomat) करियर:
राजनीति में आने से पहले वे एक सफल IFS अधिकारी थे। वे चीन और अमेरिका जैसे प्रमुख देशों में भारत के राजदूत रहे। पंडित नेहरू ने उन्हें "भारत का सर्वश्रेष्ठ राजनयिक" कहा था।
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➤ मतदान करने वाले पहले राष्ट्रपति:
के. आर. नारायणन पद पर रहते हुए आम चुनाव (1998) में मतदान केंद्र जाकर लाइन में लगकर वोट डालने वाले पहले राष्ट्रपति बने। इससे पहले राष्ट्रपतियों द्वारा वोट न डालने की परंपरा थी।
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➤ स्वर्ण जयंती राष्ट्रपति:
भारत की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ (स्वर्ण जयंती) के दौरान वही राष्ट्रपति थे। उन्होंने इस मौके पर संसद के ऐतिहासिक मध्यरात्रि सत्र को संबोधित किया था।
11. डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (2002–2007)
"सपने वो नहीं जो आप नींद में देखें, सपने वो हैं जो आपको नींद ही नहीं आने दें।" — भारत के 'मिसाइल मैन' और युवाओं के प्रेरणास्रोत।
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➤ पहले वैज्ञानिक राष्ट्रपति:
वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जो राष्ट्रपति भवन तक पहुँचे। उनका कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी, फिर भी उन्हें पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला।
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➤ मिसाइल मैन (Missile Man):
राष्ट्रपति बनने से पहले DRDO और ISRO में रहते हुए उन्होंने भारत को बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक (अग्नि और पृथ्वी) से लैस किया, जिसके लिए उन्हें 'मिसाइल मैन' कहा गया।
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➤ पोखरण-II परमाणु परीक्षण:
1998 में भारत ने जो ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण (Operation Shakti) किया था, उसके पीछे की मुख्य तकनीकी कमान डॉ. कलाम के हाथों में ही थी।
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➤ जनता के राष्ट्रपति (People's President):
उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम लोगों और बच्चों के लिए खोल दिए। वे देश के पहले राष्ट्रपति थे जो सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से युवाओं से सीधे जुड़े।
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➤ लाभ का पद विधेयक:
वे अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने 2006 में 'लाभ का पद' (Office of Profit) विधेयक को मंजूरी देने से मना कर दिया था और उसे संसद को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया था।
12. प्रतिभा पाटिल (2007–2012)
"नारी शक्ति का उदय" — भारत की आजादी के 60 साल बाद देश को पहली महिला राष्ट्रपति मिलीं।
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➤ पहली महिला राष्ट्रपति:
प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। उनका चुनाव महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया।
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➤ राजस्थान की राज्यपाल:
राष्ट्रपति बनने से ठीक पहले वे 2004 से 2007 तक राजस्थान की राज्यपाल थीं। वे राजस्थान की भी पहली महिला राज्यपाल थीं।
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➤ सुखोई में उड़ान:
वे युद्धक विमान 'सुखोई-30 MKI' में उड़ान भरने वाली दुनिया की सबसे उम्रदराज (74 वर्ष) और भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।
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➤ दया याचिकाएँ (Mercy Petitions):
इनका कार्यकाल सर्वाधिक दया याचिकाओं के निपटारे के लिए चर्चा में रहा। उन्होंने रिकॉर्ड 35 मृत्युदंड (फांसी) की सजा पाए कैदियों की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।
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➤ अविजित राजनीतिक करियर:
राष्ट्रपति बनने से पहले उनका राजनीतिक करियर लगभग 4 दशक लंबा था और एक रोचक तथ्य यह है कि वे अपने जीवन में कोई भी चुनाव नहीं हारीं।
13. प्रणब मुखर्जी (2012–2017)
"भारतीय राजनीति के संकटमोचक" (Troubleshooter) — जिनके पास हर समस्या का समाधान और हर मंत्रालय का अनुभव था।
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➤ ऑलराउंडर मंत्री:
ये एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने राष्ट्रपति बनने से पहले केंद्र सरकार में रक्षा, वित्त, विदेश और वाणिज्य जैसे सभी चार प्रमुख मंत्रालय संभाले थे।
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➤ दया याचिकाओं पर सख्त:
प्रतिभा पाटिल के विपरीत, इन्होंने दया याचिकाओं पर बहुत कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने आतंकवादी अजमल कसाब, अफजल गुरु और याकूब मेमन की दया याचिकाएँ खारिज कीं, जिसके बाद उन्हें फांसी दी गई।
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➤ भारत रत्न (2019):
उनके असाधारण सार्वजनिक जीवन के लिए उन्हें 2019 में (राष्ट्रपति पद से हटने के बाद) देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया।
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➤ पहले बंगाली राष्ट्रपति:
वे पश्चिम बंगाल राज्य से आने वाले देश के पहले राष्ट्रपति थे। उनकी याददाश्त (Photographic Memory) और संविधान के ज्ञान का लोहा विपक्ष भी मानता था।
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➤ बजट के जादूगर:
वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने 7 बार देश का बजट पेश किया था। 1980 के दशक में उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्रियों में से एक माना गया था।
14. राम नाथ कोविंद (2017–2022)
"कानपुर देहात के एक मिट्टी के घर से रायसीना हिल्स तक" — एक वकील जो देश का प्रथम नागरिक बना।
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➤ यूपी से पहले राष्ट्रपति:
यह एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाले राज्य **उत्तर प्रदेश (UP)** से बनने वाले वे भारत के **पहले राष्ट्रपति** थे।
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➤ दूसरे दलित राष्ट्रपति:
के. आर. नारायणन के बाद वे भारत के **दूसरे दलित राष्ट्रपति** बने। उनका चयन समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का प्रतीक था।
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➤ बिहार के राज्यपाल:
राष्ट्रपति पद के लिए नामांकित होने से ठीक पहले (2015-2017) वे **बिहार के राज्यपाल** थे। उन्होंने नामांकन दाखिल करने के लिए राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया था।
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➤ सुप्रीम कोर्ट के वकील:
राजनीति में पूर्णतः सक्रिय होने से पहले, वे 16 वर्षों तक दिल्ली हाईकोर्ट और **सुप्रीम कोर्ट** में वकालत कर चुके थे। वे केंद्र सरकार के स्थायी वकील (Standing Counsel) भी रहे।
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➤ मोरारजी देसाई के सचिव:
एक कम ज्ञात तथ्य यह है कि 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी, तो वे तत्कालीन प्रधानमंत्री **मोरारजी देसाई के निजी सचिव** (Personal Secretary) भी रहे थे।
15. द्रौपदी मुर्मू (2022–वर्तमान)
"ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गाँव से रायसीना हिल्स तक" — संघर्ष और सफलता की एक अद्भुत मिसाल।
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➤ पहली आदिवासी राष्ट्रपति:
श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भारत की **पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति** हैं। वे संथाल (Santhal) जनजाति से संबंध रखती हैं। उनका राष्ट्रपति बनना भारत के सामाजिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है।
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➤ सबसे युवा और 'आजाद' राष्ट्रपति:
वे भारत की अब तक की **सबसे युवा राष्ट्रपति** हैं। इसके अलावा, वे पहली ऐसी राष्ट्रपति हैं जिनका जन्म **स्वतंत्र भारत में** (1947 के बाद) हुआ है।
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➤ झारखंड की राज्यपाल:
राष्ट्रपति बनने से पहले, वे 2015 से 2021 तक **झारखंड की पहली महिला राज्यपाल** थीं। उन्होंने अपना 5 साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया था।
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➤ शिक्षिका से राष्ट्रपति:
राजनीति में आने से पहले वे एक **शिक्षिका (Teacher)** थीं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रायरंगपुर (ओडिशा) में एक शिक्षक के रूप में की और बाद में पार्षद (Councilor) का चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा।
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➤ दूसरी महिला राष्ट्रपति:
प्रतिभा पाटिल के बाद वे भारत के सर्वोच्च पद को सुशोभित करने वाली **दूसरी महिला** हैं।
💡 क्या आप जानते हैं? (महत्वपूर्ण तथ्य)
भारतीय राष्ट्रपतियों के इतिहास में कई ऐसे रोचक तथ्य छिपे हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। आइए इन्हें विस्तार से जानते हैं:
🏆 कार्यकाल और रिकॉर्ड्स
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सबसे लंबा कार्यकाल: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने 12 वर्षों (1950-1962) तक सेवा दी और दो बार चुनाव जीता।
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⏱️
सबसे छोटा कार्यकाल: डॉ. जाकिर हुसैन का कार्यकाल सबसे छोटा (मात्र 2 वर्ष) रहा क्योंकि उनकी मृत्यु पद पर रहते हुए हो गई थी।
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सबसे युवा राष्ट्रपति: द्रौपदी मुर्मू (64 वर्ष की आयु में) सबसे युवा राष्ट्रपति बनीं। इससे पहले यह रिकॉर्ड नीलम संजीव रेड्डी के नाम था।
🥇 ऐतिहासिक 'प्रथम'
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👩
प्रथम महिला: प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।
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🌲
प्रथम आदिवासी: द्रौपदी मुर्मू पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं और स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाली भी पहली राष्ट्रपति हैं।
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⚖️
प्रथम दलित: के. आर. नारायणन भारत के पहले दलित राष्ट्रपति थे।
🌟 कुछ अनोखी बातें
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निर्विरोध विजय: नीलम संजीव रेड्डी अब तक के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जो निर्विरोध (बिना किसी विपक्ष के) चुने गए थे।
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निर्दलीय उम्मीदवार: वी. वी. गिरी एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो किसी पार्टी के समर्थन के बिना, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते।
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गैर-राजनीतिक: डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक थे और उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी वे सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति बने।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q. भारत के पहले राष्ट्रपति कौन थे?
उत्तर: भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे। उन्होंने 1950 से 1962 तक लगातार दो बार इस पद को सुशोभित किया।
Q. भारत के राष्ट्रपति का मासिक वेतन कितना है?
उत्तर: वर्तमान में भारत के राष्ट्रपति का मासिक वेतन ₹5 लाख (5,00,000 रुपये) है। इसके अलावा उन्हें मुफ्त आवास, चिकित्सा सुविधाएँ और अन्य भत्ते भी मिलते हैं। यह वेतन आयकर (Income Tax) मुक्त नहीं होता है।
Q. राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र (Resignation) किसे देते हैं?
उत्तर: भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति (Vice President) को सौंपते हैं।
Q. राष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम आयु क्या होनी चाहिए?
उत्तर: भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति की न्यूनतम आयु 35 वर्ष पूरी होनी चाहिए और उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
Q. राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?
उत्तर: राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे नहीं करती। इनका चुनाव एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा होता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
Q. भारत के राष्ट्रपति कहाँ रहते हैं?
उत्तर: भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास 'राष्ट्रपति भवन' है, जो नई दिल्ली में रायसीना हिल्स पर स्थित है। यह दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रपति आवासों में से एक है।
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