प्रस्तावना: भारत अपनी विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, और इस विविधता का सबसे सुंदर रूप है हमारी भाषाएं। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से लेकर अरुणाचल तक, हर कुछ किलोमीटर पर पानी और वाणी बदल जाती है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने इस भाषाई विविधता का सम्मान करते हुए संविधान में एक विशेष स्थान निर्धारित किया—जिसे हम 'आठवीं अनुसूची' (8th Schedule) के नाम से जानते हैं।
अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, State PSC) में और सामान्य ज्ञान के लिए यह प्रश्न पूछा जाता है कि "संविधान में कितनी भाषाएं हैं?" या "कौन सी भाषा कब जोड़ी गई?"। इस विस्तृत लेख में हम इन सभी सवालों के जवाब बहुत ही सरल और रोचक तरीके से जानेंगे।
🗣️ भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची क्या है?
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची (Articles 344(1) और 351) उन भाषाओं की आधिकारिक सूची है जिन्हें भारत गणराज्य ने राजभाषा के विकास और संवर्धन के लिए मान्यता दी है।
शुरुआत में, संविधान निर्माताओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं एक साथ विकसित हों और भारत की समृद्ध संस्कृति को आगे बढ़ाएं। यह अनुसूची केवल भाषाओं की लिस्ट नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारत किसी एक भाषा का देश नहीं, बल्कि अनेक भाषाओं का संघ है।
📜 आठवीं अनुसूची की 22 भाषाओं की सूची
नीचे दी गई तालिका में वर्तमान में शामिल सभी 22 भाषाओं की सूची दी गई है। इसे याद रखने के लिए आप इसे वर्णमाला के क्रम में देख सकते हैं:
| क्रम | भाषा का नाम (हिंदी/English) | मुख्यतः कहाँ बोली जाती है? |
|---|---|---|
| 1 | असमिया (Assamese) | असम |
| 2 | बंगाली (Bengali) | पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा |
| 3 | गुजराती (Gujarati) | गुजरात |
| 4 | हिंदी (Hindi) | उत्तर और मध्य भारत |
| 5 | कन्नड़ (Kannada) | कर्नाटक |
| 6 | कश्मीरी (Kashmiri) | जम्मू और कश्मीर |
| 7 | कोंकणी (Konkani) | गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक |
| 8 | मलयालम (Malayalam) | केरल |
| 9 | मणिपुरी (Manipuri) | मणिपुर |
| 10 | मराठी (Marathi) | महाराष्ट्र |
| 11 | नेपाली (Nepali) | सिक्किम, पश्चिम बंगाल |
| 12 | उड़िया (Odia) | ओडिशा |
| 13 | पंजाबी (Punjabi) | पंजाब |
| 14 | संस्कृत (Sanskrit) | पूरे भारत में (प्राचीन/धार्मिक) |
| 15 | संथाली (Santhali) | झारखंड, बिहार, बंगाल, ओडिशा |
| 16 | सिंधी (Sindhi) | गुजरात, राजस्थान (सिंधी समुदाय) |
| 17 | तमिल (Tamil) | तमिलनाडु |
| 18 | तेलुगु (Telugu) | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना |
| 19 | उर्दू (Urdu) | पूरे भारत में (विशेषकर उत्तर भारत) |
| 20 | बोडो (Bodo) | असम |
| 21 | डोगरी (Dogri) | जम्मू और कश्मीर, हिमाचल |
| 22 | मैथिली (Maithili) | बिहार |
📅 ये भाषाएँ कब और कैसे जुड़ीं? (संशोधन इतिहास)
संविधान लागू होते समय (26 जनवरी 1950) केवल 14 भाषाएं थीं। समय-समय पर क्षेत्रीय मांगों और भाषाई विकास को देखते हुए संविधान में संशोधन किए गए और नई भाषाएं जोड़ी गईं। आइए इस यात्रा को समझते हैं:
1. 21वां संविधान संशोधन (1967)
यह पहला भाषाई विस्तार था। इसमें 'सिंधी' (Sindhi) भाषा को 15वीं भाषा के रूप में जोड़ा गया। सिंधी समुदाय विभाजन के बाद भारत के कई हिस्सों में बसा था, और यह उनकी सांस्कृतिक पहचान के लिए एक बड़ी जीत थी।
2. 71वां संविधान संशोधन (1992)
इस संशोधन के द्वारा तीन और भाषाओं को आठवीं अनुसूची में जगह मिली। इसे याद रखने की ट्रिक है 'नमक' (NAMAK):
- ✅ नेपाली (Nepali)
- ✅ मणिपुरी (Manipuri)
- ✅ कोंकणी (Konkani)
इसके बाद कुल भाषाओं की संख्या 18 हो गई।
3. 92वां संविधान संशोधन (2003)
यह अब तक का सबसे बड़ा विस्तार था। अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार के समय 4 नई जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को जोड़ा गया। इसे याद रखने की ट्रिक है 'BDMS' (जैसे डॉक्टर की डिग्री):
- ✅ B - बोडो (Bodo)
- ✅ D - डोगरी (Dogri)
- ✅ M - मैथिली (Maithili)
- ✅ S - संथाली (Santhali)
इस प्रकार, वर्तमान में कुल संख्या 22 हो गई है।
⚖️ संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद (Articles 343-351)
संविधान का भाग-17 (Part XVII) राजभाषा से संबंधित है। अक्सर छात्र केवल अनुच्छेद 343 याद करते हैं, लेकिन परीक्षा की दृष्टि से अन्य अनुच्छेद भी महत्वपूर्ण हैं।
📌 अनुच्छेद 343: संघ की राजभाषा
यह अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि संघ (Central Government) की राजभाषा हिंदी होगी और लिपि देवनागरी होगी। लेकिन, इसमें यह भी प्रावधान था कि संविधान लागू होने के 15 वर्षों तक अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा (जिसे बाद में राजभाषा अधिनियम 1963 द्वारा अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया)।
| अनुच्छेद | विवरण (Details) |
|---|---|
| 344 | राजभाषा आयोग: राष्ट्रपति हर 5/10 साल पर एक आयोग बनाएंगे जो हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने और अंग्रेजी को कम करने के सुझाव देगा। |
| 345 | राज्यों की राजभाषा: राज्य विधानमंडल यह तय कर सकता है कि उस राज्य की आधिकारिक भाषा हिंदी होगी या वहां की कोई क्षेत्रीय भाषा। |
| 346 | संचार की भाषा: केंद्र और राज्य या दो राज्यों के बीच पत्र-व्यवहार की भाषा क्या होगी (सामान्यतः हिंदी या अंग्रेजी)। |
| 347 | जनसंख्या की मांग: यदि किसी राज्य की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा अपनी भाषा को मान्यता दिलाना चाहता है, तो राष्ट्रपति उसे मान्यता दे सकते हैं। |
| 348 | न्यायपालिका की भाषा: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की कार्यवाही तथा संसद के विधेयक मुख्य रूप से अंग्रेजी में होंगे। |
| 350A | प्राथमिक शिक्षा: यह निर्देश देता है कि बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में दी जानी चाहिए। |
| 350B | भाषाई अल्पसंख्यक अधिकारी: भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति। |
| 351 | हिंदी का विकास: यह संघ का कर्तव्य है कि वह हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति (Composite Culture) की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके। |
🏛️ भारत की शास्त्रीय भाषाएँ (Classical Languages)
आठवीं अनुसूची के अलावा, भारत सरकार कुछ भाषाओं को उनके पुराने इतिहास और समृद्ध साहित्य के आधार पर 'शास्त्रीय भाषा' (Classical Language) का दर्जा देती है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है क्योंकि हाल ही में इसमें बदलाव हुए हैं।
शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के लिए शर्तें:
- भाषा का इतिहास 1500-2000 वर्ष पुराना हो।
- इसका साहित्य मौलिक हो (किसी दूसरी भाषा से न लिया गया हो)।
- इसकी प्राचीन साहित्यिक परंपरा हो।
वर्तमान में शास्त्रीय भाषाएं:
🔴 अक्टूबर 2024 अपडेट: केंद्र सरकार ने मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को भी शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दी है। यह भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
✨ आठवीं अनुसूची में शामिल होने के क्या फायदे हैं?
किसी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग अक्सर उठती रहती है (जैसे भोजपुरी या राजस्थानी के लिए)। आखिर ऐसा क्यों? इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- ✅ साहित्य अकादमी पुरस्कार: सरकार उस भाषा के लेखकों और साहित्य को प्रोत्साहन देने के लिए पुरस्कार देती है।
- ✅ संसद में प्रयोग: सांसद उस भाषा का प्रयोग संसद में भाषण देने के लिए कर सकते हैं।
- ✅ परीक्षाओं में विकल्प: UPSC जैसी अखिल भारतीय परीक्षाओं में छात्र उस भाषा को माध्यम के रूप में चुन सकते हैं।
- ✅ नोट पर स्थान: भारतीय करेंसी नोट (रुपये) पर जो भाषा पैनल होता है, उसमें इन भाषाओं को स्थान मिलता है।
❓ क्या हिंदी भारत की 'राष्ट्रभाषा' (National Language) है?
यह एक बहुत बड़ी भ्रांति है। तकनीकी रूप से और संवैधानिक रूप से, भारत की कोई एक 'राष्ट्रभाषा' नहीं है।
हिंदी भारत की 'राजभाषा' (Official Language) है, यानी कामकाज की भाषा। अनुच्छेद 343 के तहत इसे राजभाषा का दर्जा मिला है। गुजरात हाईकोर्ट ने भी 2010 में स्पष्ट किया था कि संविधान में 'राष्ट्रभाषा' जैसा कोई शब्द वर्णित नहीं है। संविधान सभी 22 भाषाओं को समान सम्मान देता है।
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📝 निष्कर्ष
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति की वाहक है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची इस बात का सबूत है कि लोकतंत्र में हर आवाज और हर भाषा का महत्व है। चाहे वह सिंधी हो, संथाली हो या हिंदी—सभी भाषाएं मिलकर 'भारत' का निर्माण करती हैं।
हमें गर्व होना चाहिए कि हम एक ऐसे देश के नागरिक हैं जहाँ भाषाओं की विविधता को समस्या नहीं, बल्कि शक्ति माना गया है। आने वाले समय में भोजपुरी, राजस्थानी और तुलु जैसी भाषाओं को भी इसमें शामिल किए जाने की संभावना है, जो इस गुलदस्ते को और भी महका देगा।
"कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी।" — भारतीय कहावत
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
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