भारत के सभी गवर्नर जनरल्स की सूची | Governor Generals of India

ब्रिटिशकालीन भारत के इतिहास को समझने के लिए गवर्नर जनरल और वायसराय के कार्यकाल को जानना अत्यंत आवश्यक है। इस लेख में 1773 से लेकर 1950 तक, बंगाल के पहले गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स से लेकर स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी तक की पूरी सूची दी गई है।

यहाँ आप इन शासकों द्वारा किए गए प्रमुख सामाजिक सुधारों, ऐतिहासिक युद्धों, संधियों और लागू किए गए महत्वपूर्ण अधिनियमों (Acts) के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे। यह विस्तृत जानकारी UPSC, SSC, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए एक बेहतरीन 'रिवीजन नोट्स' साबित होगी।




भारत के सभी गवर्नर जनरल्स की सूची | Governor Generals of India

🏛️ गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल (1773–1833)

🏛️ वॉरेन हेस्टिंग्स (Warren Hastings) – 1773–1785

  • प्रथम गवर्नर जनरल: रेगुलेटिंग एक्ट 1773 के तहत ये बंगाल के पहले गवर्नर जनरल बने।
  • द्वैध शासन की समाप्ति: इन्होंने रॉबर्ट क्लाइव द्वारा शुरू की गई 'द्वैध शासन प्रणाली' (Dual Government System) को समाप्त किया।
  • कलेक्टर पद की शुरुआत: राजस्व वसूली और न्याय व्यवस्था के लिए जिलों में 'कलेक्टर' (District Collector) के पद का सृजन इन्होंने ही किया।
  • प्रमुख युद्ध: इनके कार्यकाल में 'प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध' (सालबाई की संधि से समाप्त) और 'द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध' लड़ा गया।
  • शिक्षा एवं संस्कृति: 1781 में 'कलकत्ता मदरसा' की स्थापना की और 1784 में 'एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल' की स्थापना में सर विलियम जोन्स की मदद की।
  • गीता का अनुवाद: चार्ल्स विल्किंस ने भगवद्गीता का अंग्रेजी में अनुवाद किया, जिसकी प्रस्तावना (Introduction) वॉरेन हेस्टिंग्स ने लिखी थी।
  • महाभियोग (Impeachment): अन्याय और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण इंग्लैंड वापस जाने पर इन पर महाभियोग चलाया गया (हालांकि बाद में वे बरी हो गए)।

🏛️ सर जॉन मैक्फर्सन (Sir John Macpherson) – 1785–1786 (कार्यवाहक)

  • अस्थायी नियुक्ति: वारेन हेस्टिंग्स के इस्तीफे के बाद, काउंसिल के सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के कारण इन्हें कार्यवाहक गवर्नर जनरल बनाया गया।
  • महादजी सिंधिया से तनातनी: इनके कार्यकाल में मराठा सरदार महादजी सिंधिया ने अंग्रेजों से मुगल बादशाह के नाम पर 'चौथ' (टैक्स) की मांग की, जिसे मैक्फर्सन ने सख्ती से मना कर दिया।
  • आर्थिक स्थिति: इन्होंने कंपनी के गिरते वित्त को संभालने के लिए खर्चों में कटौती करने का प्रयास किया, हालांकि इनकी नीतियों को बहुत प्रभावी नहीं माना गया।
  • कॉर्नवालिस द्वारा आलोचना: इनके प्रशासन को अक्सर कमजोर और भ्रष्ट माना जाता था। इनके बाद आए लॉर्ड कॉर्नवालिस ने इनके कार्यकाल की व्यवस्था की आलोचना की थी।

🏛️ लॉर्ड कॉर्नवालिस (Lord Cornwallis) – 1786–1793

  • सिविल सेवा का जनक: इन्हें 'भारत में सिविल सेवा का जनक' (Father of Civil Services in India) कहा जाता है। इन्होंने प्रशासन में सुधार किया और उच्च पदों पर नियुक्ति के नियम बनाए।
  • स्थायी बंदोबस्त (1793): बंगाल, बिहार और उड़ीसा में भू-राजस्व की 'स्थायी बंदोबस्त' (Permanent Settlement) या 'जमींदारी प्रथा' लागू की।
  • पुलिस सुधार: कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमित पुलिस बल का गठन किया, 'थाना' स्थापित किए और 'दरोगा' (Daroga) के पद का सृजन किया।
  • कॉर्नवालिस कोड: 1793 में 'कॉर्नवालिस संहिता' लागू की, जो शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) पर आधारित थी। इसके तहत कर (Revenue) और न्याय (Justice) प्रशासन को अलग कर दिया गया।
  • तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध: टीपू सुल्तान को हराया, जिसके बाद 1792 में 'श्रीरंगपट्टनम की संधि' हुई।
  • गाजीपुर में समाधि: ये एकमात्र गवर्नर जनरल हैं जिनकी समाधि भारत (गाजीपुर, उत्तर प्रदेश) में स्थित है (इनकी मृत्यु इनके दूसरे कार्यकाल 1805 में हुई थी)।

🏛️ सर जॉन शोर (Sir John Shore) – 1793–1798

  • अहस्तक्षेप की नीति: ये अपनी 'तटस्थता या अहस्तक्षेप की नीति' (Policy of Non-Intervention) के लिए प्रसिद्ध थे। इन्होंने भारतीय राज्यों के आपसी झगड़ों में न पड़ने का फैसला किया।
  • खर्दा का युद्ध (1795): जब मराठों ने निजाम पर हमला किया (खर्दा का युद्ध), तो शोर ने अपनी नीति के तहत निजाम की मदद नहीं की। इसमें निजाम की हार हुई।
  • स्थायी बंदोबस्त के वास्तुकार: यद्यपि स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) लॉर्ड कॉर्नवालिस ने लागू किया था, लेकिन इसकी मूल योजना और ड्राफ्ट जॉन शोर ने ही तैयार किया था।
  • चार्टर एक्ट 1793: इनके कार्यकाल में ब्रिटिश संसद द्वारा 'चार्टर एक्ट 1793' पारित किया गया, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया।
  • अवध में हस्तक्षेप: अपनी अहस्तक्षेप नीति के अपवाद स्वरूप, इन्होंने अवध के उत्तराधिकार मामले में हस्तक्षेप किया और वजीर अली को हटाकर सआदत अली खान को नवाब बनाया।
  • द्वितीय रोहिल्ला युद्ध (1794): इनके समय में ही रुहेलखंड में द्वितीय रोहिल्ला युद्ध हुआ था।

🏛️ लॉर्ड वेलेजली (Lord Wellesley) – 1798–1805

  • सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance): भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के लिए इस नीति का व्यापक उपयोग किया। हैदराबाद (1798) इसे स्वीकार करने वाला पहला राज्य था।
  • चौथा आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799): इसी युद्ध में टीपू सुल्तान की मृत्यु हुई और मैसूर पर अंग्रेजों का वर्चस्व स्थापित हुआ।
  • फोर्ट विलियम कॉलेज (1800): नागरिक सेवा (Civil Services) के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए कलकत्ता में इस कॉलेज की स्थापना की।
  • द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1803-1805): मराठों के साथ संघर्ष हुआ और पेशवा बाजीराव द्वितीय ने अंग्रेजों के साथ 'बेसिन की संधि' (1802) स्वीकार की।
  • प्रेस पर प्रतिबंध (1799): भारत में प्रेस पर सेंसरशिप लागू करने वाला यह पहला गवर्नर जनरल था (Censorship of Press Act)।
  • 'बंगाल का शेर': वह स्वयं को 'बंगाल का शेर' (Lion of Bengal) कहता था।
  • शिशु हत्या पर रोक: 1802 में एक नियम पारित करके गंगा में बच्चों को फेंकने या शिशु हत्या की प्रथा पर रोक लगाने का प्रयास किया।

🏛️ सर जॉर्ज बार्लो (Sir George Barlow) – 1805–1807 (कार्यवाहक)

  • वेल्लोर विद्रोह (1806): इनके कार्यकाल की सबसे ऐतिहासिक घटना 'वेल्लोर का सिपाही विद्रोह' थी। यह 1857 की क्रांति से पहले भारतीय सिपाहियों द्वारा किया गया पहला बड़ा सशस्त्र विद्रोह था।
  • अहस्तक्षेप की नीति का पालन: इन्होंने कंपनी के खर्चों को कम करने के लिए सख्ती से अहस्तक्षेप की नीति (Policy of Non-Intervention) का पालन किया और नए युद्धों से दूरी बनाए रखी।
  • राजघाट की संधि (1805): यशवंत राव होल्कर के साथ संधि करके द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त किया।
  • क्षेत्रों की वापसी: मराठों के साथ शांति स्थापित करने के लिए इन्होंने ग्वालियर और गोहद के किले सिंधिया को वापस लौटा दिए, जिसकी ब्रिटिश अधिकारियों ने आलोचना भी की थी।
  • दास प्रथा पर रोक: 1807 में दासों के व्यापार पर कुछ हद तक रोक लगाने के प्रयास किए गए।

🏛️ लॉर्ड मिंटो I (Lord Minto I) – 1807–1813

  • अमृतसर की संधि (1809): महाराजा रणजीत सिंह के साथ ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर किए। इस संधि में चार्ल्स मेटकाफ ने मध्यस्थता की और 'सतलज नदी' को दोनों राज्यों के बीच की सीमा माना गया।
  • चार्टर एक्ट 1813: इनके कार्यकाल के अंत में 1813 का चार्टर एक्ट पारित हुआ, जिससे चाय और चीन के व्यापार को छोड़कर ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया।
  • नेपोलियन के खतरे का सामना: फ्रांसीसी और रूसी आक्रमण के खतरे को रोकने के लिए इन्होंने फारस (ईरान), अफगानिस्तान (काबुल) और सिंध में कूटनीतिक मिशन भेजे।
  • विदेशी विजय: भारत के बाहर फ्रांसीसी और डच प्रभाव को कम करने के लिए मॉरीशस (1810) और जावा (1811) पर कब्जा किया।
  • त्रावणकोर का विद्रोह: 1808-09 में त्रावणकोर के दीवान वेलु थम्पी (Velu Thampi) ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया, जिसे मिंटो के कार्यकाल में दबा दिया गया।
  • बुंदेलखंड विलय: बुंदेलखंड में अराजकता को समाप्त कर उसे कंपनी के नियंत्रण में लाया गया।

🏛️ लॉर्ड हेस्टिंग्स (Lord Hastings) – 1813–1823

  • आंग्ल-नेपाल युद्ध (1814-16): गोरखाओं को हराया और 'सुगौली की संधि' (Treaty of Sugauli, 1816) पर हस्ताक्षर किए, जिससे अंग्रेजों को नैनीताल, मसूरी और शिमला जैसे पहाड़ी क्षेत्र मिले।
  • तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817-19): मराठा शक्ति को पूरी तरह कुचल दिया और 'पेशवा' का पद हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। बाजीराव द्वितीय को पेंशन देकर बिठूर (कानपुर) भेज दिया गया।
  • पिंडारियों का दमन: 1817 में क्रूर लुटेरे गिरोह 'पिंडारियों' (Pindaris) का पूरी तरह सफाया किया, जो मध्य भारत में आतंक का कारण बने हुए थे।
  • रैयतवाड़ी व्यवस्था (1820): इनके कार्यकाल में थॉमस मुनरो ने मद्रास में 'रैयतवाड़ी व्यवस्था' (Ryotwari System) लागू की, जिसमें किसान सीधे सरकार को टैक्स देते थे।
  • अहस्तक्षेप नीति का त्याग: इन्होंने कंपनी की पुरानी 'अहस्तक्षेप की नीति' को त्यागकर 'ब्रिटिश सर्वोच्चता' (British Paramountcy) को स्थापित करने की नीति अपनाई।
  • बंगाल काश्तकारी अधिनियम (1822): किसानों को जमींदारों के शोषण से बचाने और उनके अधिकार सुरक्षित करने के लिए 'Tenancy Act' पारित किया।
  • प्रेस पर उदारता: इन्होंने समाचार पत्रों पर लगे कड़े सेंसरशिप (प्रतिबंधों) को हटा दिया, जो 1799 में वेलेजली ने लगाए थे।

🏛️ लॉर्ड अमहर्स्ट (Lord Amherst) – 1823–1828

  • प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824-1826): इनके कार्यकाल की सबसे प्रमुख घटना। इसमें अंग्रेजों की जीत हुई और 1826 में 'याण्डबू की संधि' (Treaty of Yandabo) पर हस्ताक्षर हुए।
  • ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार: बर्मा युद्ध के बाद अंग्रेजों ने असम, मणिपुर, अराकान और तनासरीम जैसे क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया।
  • बैरकपुर का सैन्य विद्रोह (1824): भारतीय सिपाहियों ने बर्मा जाने के लिए 'समुद्र पार' करने से मना कर दिया (क्योंकि इसे धर्म भ्रष्ट होना माना जाता था)। इस विद्रोह को बेरहमी से कुचल दिया गया।
  • भरतपुर पर विजय (1826): लॉर्ड लेक जो काम पहले नहीं कर पाए थे, वह अमहर्स्ट के समय हुआ। अंग्रेजों ने भरतपुर के अजय माने जाने वाले किले (लौहगढ़) को जीत लिया।
  • मुगल बादशाह से बराबरी: अमहर्स्ट पहले गवर्नर जनरल थे जिन्होंने मुगल बादशाह (अकबर द्वितीय) से 'बराबरी के स्तर' पर मुलाकात की। इससे यह संदेश गया कि कंपनी अब मुगलों की जागीरदार नहीं, बल्कि सर्वोच्च शक्ति है।
  • शिमला ग्रीष्मकालीन प्रवास: 1827 में शिमला जाने वाले ये पहले गवर्नर जनरल थे, जिसके बाद शिमला ब्रिटिश शासकों का पसंदीदा ग्रीष्मकालीन गंतव्य बन गया।

🏛️ लॉर्ड विलियम बेंटिक (Lord William Bentinck) – 1828–1833

  • सती प्रथा का अंत (1829): राजा राममोहन राय के प्रयासों से इन्होंने 'नियम 17' (Regulation XVII) बनाकर सती प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया। यह इनका सबसे ऐतिहासिक कार्य था।
  • ठगी प्रथा का दमन (1830): उस समय ठगों (लुटेरों) का बहुत आतंक था। बेंटिक ने 'कर्नल स्लीमैन' (Colonel Sleeman) को नियुक्त कर ठगी प्रथा का पूरी तरह सफाया किया।
  • भारत के प्रथम गवर्नर जनरल: 'चार्टर एक्ट 1833' के द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर 'भारत का गवर्नर जनरल' कर दिया गया। इस प्रकार वे भारत के पहले गवर्नर जनरल बने।
  • सरकारी सेवाओं में भेदभाव समाप्त: 1833 के एक्ट की धारा 87 के तहत यह तय किया गया कि किसी भी भारतीय को केवल धर्म, जन्मस्थान या रंग के आधार पर सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा।
  • न्यायालयों में भाषा सुधार: इन्होंने अदालतों में फारसी (Persian) की जगह स्थानीय भाषाओं और उच्च अदालतों में अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति दी।
  • सर्किट कोर्ट की समाप्ति: कॉर्नवालिस द्वारा शुरू किए गए प्रांतीय अपीलीय न्यायालयों (Circuit Courts) को बंद कर दिया क्योंकि वे बहुत धीमे थे, और उनके कार्य जिला कलेक्टरों को सौंप दिए।
  • उदारवादी दृष्टिकोण: इन्हें भारत में सबसे 'उदार और परोपकारी' (Benevolent) ब्रिटिश शासक माना जाता है जिन्होंने भारतीय समाज की कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया।

🏛️ गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया (1833–1858)

🏛️ लॉर्ड विलियम बेंटिक (Lord William Bentinck) – 1833–1835

  • पदनाम में परिवर्तन: 1833 के चार्टर एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल को 'भारत का गवर्नर जनरल' बना दिया गया। इस प्रकार वे भारत के पहले गवर्नर जनरल बने।
  • अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम (1835): लॉर्ड मैकाले की सिफारिश (Macaulay's Minute) को स्वीकार करते हुए, अंग्रेजी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाया गया। इसका उद्देश्य अंग्रेजी पढ़ा-लिखा एक ऐसा वर्ग तैयार करना था जो रंग-रूप से भारतीय हो लेकिन सोच से अंग्रेज।
  • कलकत्ता मेडिकल कॉलेज (1835): भारत में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की शुरुआत करते हुए इन्होंने 1835 में 'कलकत्ता मेडिकल कॉलेज' की स्थापना की।
  • कुर्ग का विलय (1834): वहां के राजा पर कुशासन का आरोप लगाकर 1834 में कुर्ग (Coorg) और कछार रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया।
  • विधि सदस्य की नियुक्ति: गवर्नर जनरल की काउंसिल में एक नए 'विधि सदस्य' (Law Member) को जोड़ा गया। लॉर्ड मैकाले (Macaulay) इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले व्यक्ति थे।
  • विधि आयोग (Law Commission): भारतीय कानूनों को संहिताबद्ध (Codify) करने के लिए मैकाले की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग का गठन किया गया। इसी ने आगे चलकर IPC (Indian Penal Code) का मसौदा तैयार किया।

🏛️ सर चार्ल्स मेटकाफ (Sir Charles Metcalfe) – 1835–1836 (कार्यवाहक)

  • भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता: इन्हें इतिहास में 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' (Liberator of the Indian Press) के नाम से जाना जाता है। यह प्रश्न परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
  • प्रेस एक्ट 1835: इन्होंने 1823 के कुख्यात लाइसेंसिंग नियमों (जो जॉन एडम्स द्वारा लगाए गए थे) को रद्द कर दिया और प्रेस को पूर्ण स्वतंत्रता दी।
  • समाचार पत्रों का विकास: इनके इस साहसिक कदम के कारण भारत में अंग्रेजी और देशी भाषाओं के समाचार पत्रों का तेजी से विकास हुआ।
  • कंपनी का विरोध: ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशक (Directors) उनकी इस उदार नीति से नाराज थे, जिसके कारण उन्हें स्थायी गवर्नर जनरल नहीं बनाया गया और वापस बुला लिया गया।

🏛️ लॉर्ड ऑकलैंड (Lord Auckland) – 1836–1842

  • प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध (1838-42): यह इनके कार्यकाल की सबसे विनाशकारी घटना थी। इसे 'ऑकलैंड की मूर्खता' भी कहा जाता है, जिसमें अंग्रेजों को अफगानिस्तान में भारी जन-धन की हानि उठानी पड़ी।
  • त्रिपक्षीय संधि (1838): अफगानिस्तान के अमीर दोस्त मोहम्मद को हटाने के लिए अंग्रेजों, महाराजा रणजीत सिंह और शाह शुजा के बीच यह ऐतिहासिक संधि हुई।
  • जी.टी. रोड (G.T. Road): इन्होंने शेरशाह सूरी द्वारा बनवाए गए मार्ग की मरम्मत करवाई और 1839 में उसका नाम बदलकर 'ग्रैंड ट्रंक रोड' (Grand Trunk Road) रखा, जो कलकत्ता से दिल्ली तक जाती थी।
  • तीर्थ यात्रा कर की समाप्ति: भारतीय जनता को राहत देते हुए इन्होंने धार्मिक स्थलों पर लगने वाले 'तीर्थ यात्रा कर' (Pilgrimage Tax) को समाप्त कर दिया।
  • महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु: पंजाब के शक्तिशाली शासक महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु (1839) इन्हीं के कार्यकाल के दौरान हुई, जिसके बाद पंजाब में अस्थिरता आ गई।
  • शिक्षा सुधार: इन्होंने प्राच्य (Oriental) और पाश्चात्य (Anglicist) शिक्षा विवाद को कुछ हद तक शांत किया और भारतीय भाषाओं के स्कूलों को भी सरकारी अनुदान (Grant) देने की शुरुआत की।

🏛️ लॉर्ड एलेनबरो (Lord Ellenborough) – 1842–1844

  • सिंध का विलय (1843): इनके कार्यकाल की सबसे प्रमुख घटना। चार्ल्स नेपियर के नेतृत्व में सिंध को पूर्ण रूप से ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। नेपियर ने कहा था, "वह सिंध को जीतने का पाप (Sin) कर रहे हैं।"
  • दास प्रथा का अंत (1843): इन्होंने 'अधिनियम V' (Act V of 1843) पारित करके भारत में सदियों से चली आ रही दास प्रथा (Slavery) को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित कर समाप्त कर दिया।
  • प्रथम अफगान युद्ध की समाप्ति: इन्होंने लॉर्ड ऑकलैंड के समय से चल रहे विनाशकारी अफगान युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त किया।
  • ग्वालियर के साथ युद्ध (1843): ग्वालियर की सेना को महाराजपुर और पनिहार की लड़ाई में हराया, जिसके बाद ग्वालियर की शक्ति सीमित कर दी गई।
  • वापसी: इनका स्वभाव थोड़ा हठधर्मी था और कंपनी के निदेशकों (Directors) के साथ इनके संबंध अच्छे नहीं थे, इसलिए इन्हें समय से पहले ही वापस बुला लिया गया।

🏛️ लॉर्ड हार्डिंग I (Lord Hardinge I) – 1844–1848

  • प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-1846): इनके समय की सबसे बड़ी सैन्य घटना। इसमें सिखों की हार हुई और 'लाहौर की संधि' (Treaty of Lahore, 1846) के साथ युद्ध समाप्त हुआ।
  • नरबलि प्रथा का अंत: ओडिशा की 'खोंड' (Khond) जनजाति में प्रचलित क्रूर 'नरबलि' (जिसमें इंसान की बलि दी जाती थी) प्रथा को समाप्त करने के लिए इन्होंने कैंपबेल (Campbell) को नियुक्त किया।
  • सरकारी नौकरी में अंग्रेजी: 1844 में इन्होंने घोषणा की कि सरकारी नौकरियों में उन भारतीयों को प्राथमिकता दी जाएगी जो अंग्रेजी भाषा जानते हैं। इससे अंग्रेजी शिक्षा का महत्व बढ़ गया।
  • शिशु हत्या पर रोक: इन्होंने कन्या भ्रूण हत्या (Female Infanticide) को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए और इसे गंभीर अपराध घोषित किया।
  • कश्मीर का अलग होना: लाहौर की संधि के तहत अंग्रेजों ने कश्मीर को गुलाब सिंह को बेच दिया, जिससे कश्मीर एक अलग रियासत बन गया।
  • नमक कर में कमी: इन्होंने नमक पर लगने वाले कर (Salt Tax) को कम किया और चुंगी (Octroi) को समाप्त कर व्यापार को सुगम बनाया।

🏛️ लॉर्ड डलहौजी (Lord Dalhousie) – 1848–1856

  • व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse): यह डलहौजी की सबसे विवादास्पद नीति थी। इसके तहत जिन भारतीय राजाओं का कोई पुत्र नहीं था, उनके राज्यों को कंपनी में मिला लिया गया। सतारा (1848) इस नीति का शिकार होने वाला पहला राज्य था। इसके बाद झाँसी, नागपुर और संबलपुर भी हड़प लिए गए।
  • भारतीय रेलवे का जनक: 16 अप्रैल 1853 को भारत की पहली यात्री ट्रेन 'बॉम्बे से ठाणे' (34 किमी) के बीच चली। इसीलिए डलहौजी को 'भारतीय रेलवे का जनक' कहा जाता है।
  • डाक और तार सेवा: 1854 में 'पोस्ट ऑफिस एक्ट' पारित किया और पहली बार डाक टिकटों (Postage Stamps) का प्रचलन शुरू हुआ। साथ ही, कलकत्ता से आगरा के बीच पहली बार 'इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ लाइन' शुरू की।
  • वुड्स डिस्पैच (1854): शिक्षा में सुधार के लिए 'वुड्स डिस्पैच' लागू किया, जिसे 'भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा' (Magna Carta of English Education) कहा जाता है। इसके तहत लंदन यूनिवर्सिटी की तर्ज पर कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में यूनिवर्सिटी बनाने का सुझाव दिया गया।
  • विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856): ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रयासों से डलहौजी ने 'विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' का मसौदा (Draft) तैयार किया, जिसे बाद में कैनिंग ने पारित किया।
  • अवध का विलय (1856): डलहौजी ने अवध के नवाब वाजिद अली शाह पर 'कुशासन' (Maladministration) का आरोप लगाकर अवध को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया।
  • पीडब्ल्यूडी (PWD) की स्थापना: भारत में पहली बार एक अलग 'लोक निर्माण विभाग' (Public Works Department - PWD) की स्थापना की।
  • पंजाब का विलय: द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848-49) के बाद पंजाब का पूर्ण विलय किया गया और प्रसिद्ध 'कोहिनूर हीरा' महारानी विक्टोरिया को भेज दिया गया।

🏛️ लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning) – 1856–1858

  • अंतिम गवर्नर जनरल: ये ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा नियुक्त 'भारत के अंतिम गवर्नर जनरल' थे। इसके बाद शासन ब्रिटिश ताज के हाथों में चला गया।
  • 1857 की क्रांति: इनके कार्यकाल की सबसे ऐतिहासिक घटना '1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' था। इन्होंने इस विद्रोह को दबाने और शांति स्थापित करने का कार्य किया।
  • विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856): यद्यपि इसका मसौदा डलहौजी ने तैयार किया था, लेकिन इसे कानून के रूप में पारित लॉर्ड कैनिंग ने किया। यह समाज सुधार की दिशा में बड़ा कदम था।
  • तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना (1857): वुड्स डिस्पैच की सिफारिशों पर अमल करते हुए 1857 में कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में लंदन यूनिवर्सिटी की तर्ज पर तीन विश्वविद्यालय स्थापित किए गए।
  • सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम (1856): इन्होंने 'General Service Enlistment Act' पारित किया, जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार कहीं भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया। यह 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख कारण बना।

👑 भारत के वायसराय (Viceroy of India) – 1858–1947

👑 लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning) – 1858–1862

  • भारत के प्रथम वायसराय: 'भारत शासन अधिनियम 1858' के तहत कंपनी का शासन समाप्त हो गया और सीधा ब्रिटिश ताज (Crown) का शासन शुरू हुआ। कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।
  • इलाहाबाद घोषणा (1858): 1 नवंबर 1858 को कैनिंग ने इलाहाबाद में महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र पढ़ा, जिसे भारतीय शिक्षित वर्ग ने अपने 'अधिकारों का मैग्नाकार्टा' कहा। इसमें धार्मिक अहस्तक्षेप और राजाओं के सम्मान का वादा किया गया था।
  • IPC और CrPC लागू: इनके कार्यकाल में भारतीय दंड संहिता (IPC - 1860) और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC - 1861) को कानूनी रूप दिया गया।
  • भारतीय परिषद अधिनियम 1861: इस एक्ट के द्वारा पहली बार 'पोर्टफोलियो प्रणाली' (विभागीय प्रणाली) की शुरुआत हुई, जो भारत में मंत्रिमंडलीय व्यवस्था (Cabinet System) की नींव बनी।
  • आयकर (Income Tax) की शुरुआत: 1857 की क्रांति में हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए 1860 में अर्थशास्त्री विल्सन द्वारा पहली बार भारत में 'आयकर' लगाया गया।
  • नील विद्रोह (1859-60): बंगाल में नील की खेती करने वाले किसानों का व्यापक विद्रोह इन्हीं के समय हुआ था, जिसका चित्रण 'दीनबंधु मित्र' ने 'नील दर्पण' नाटक में किया है।
  • दयालु कैनिंग (Clemency Canning): 1857 के विद्रोहियों के प्रति उदार व्यवहार करने के कारण आलोचकों ने व्यंग्य में इन्हें 'दयालु कैनिंग' की उपाधि दी थी।

👑 लॉर्ड एल्गिन I (Lord Elgin I) – 1862–1863

  • वहाबी आंदोलन का दमन: इनके छोटे कार्यकाल की सबसे प्रमुख घटना 'वहाबी आंदोलन' (Wahabi Movement) का दमन करना था। यह एक कट्टरपंथी इस्लामिक आंदोलन था जिसे इन्होंने अंबाला अभियान चलाकर कुचला।
  • उच्च न्यायालयों की स्थापना (1862): 1861 के अधिनियम के तहत, जुलाई-अगस्त 1862 में कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में उच्च न्यायालयों (High Courts) ने विधिवत कार्य करना शुरू किया।
  • धर्मशाला में मृत्यु: ये भारत के दूसरे ऐसे शासक थे जिनकी मृत्यु कार्यकाल के दौरान भारत में हुई (पहले कॉर्नवालिस थे)। 1863 में दिल का दौरा पड़ने से धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में इनका निधन हो गया।
  • समाधि: इनकी समाधि धर्मशाला के प्रसिद्ध 'सेंट जॉन चर्च' (St. John in the Wilderness Church) में स्थित है।
  • नीति: इन्होंने लॉर्ड कैनिंग की नीतियों का ही अनुसरण किया और भारतीय राजाओं के मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाई।

👑 सर जॉन लॉरेंस (Sir John Lawrence) – 1864–1869

  • शानदार निष्क्रियता (Policy of Masterly Inactivity): अफगानिस्तान के प्रति इन्होंने पूर्ण अहस्तक्षेप की नीति अपनाई, जिसे इतिहास में 'शानदार निष्क्रियता' के नाम से जाना जाता है।
  • उड़ीसा का अकाल (1866): इनके कार्यकाल में उड़ीसा में भीषण अकाल पड़ा, जिसे 'प्रकोप का समुद्र' (Sea of Calamity) कहा गया। इसमें लाखों लोगों की जान गई।
  • अकाल आयोग का गठन: उड़ीसा अकाल के बाद, भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए इन्होंने हेनरी कैंपबेल की अध्यक्षता में एक 'अकाल आयोग' (Famine Commission) का गठन किया।
  • भारत-यूरोप टेलीग्राफ (1865): 1865 में भारत और यूरोप के बीच पहली 'समुद्री टेलीग्राफ सेवा' (Telegraph communication) शुरू हुई, जिससे संचार व्यवस्था में क्रांति आ गई।
  • शिमला - ग्रीष्मकालीन राजधानी: इन्होंने आधिकारिक तौर पर शिमला को भारत की 'ग्रीष्मकालीन राजधानी' (Summer Capital) घोषित किया।
  • काश्तकारी अधिनियम: किसानों के हितों की रक्षा के लिए इन्होंने पंजाब और अवध में 'काश्तकारी अधिनियम' (Tenancy Acts) पारित किए।
  • 'पंजाब का रक्षक': 1857 की क्रांति के दौरान पंजाब में शांति बनाए रखने के लिए इन्हें 'पंजाब का रक्षक' (Saviour of Punjab) भी कहा जाता है।

👑 लॉर्ड मेयो (Lord Mayo) – 1869–1872

  • पहली जनगणना (1872): भारत में 'पहली जनगणना' (First Census) का आयोजन इन्हीं के कार्यकाल में हुआ, हालांकि नियमित (दशकीय) जनगणना 1881 से शुरू हुई।
  • वित्तीय विकेंद्रीकरण के जनक: भारत में 'वित्तीय विकेंद्रीकरण' (Financial Decentralization) की शुरुआत इन्होंने ही की, जिसके तहत प्रांतों को अपने खर्च चलाने के लिए कुछ अधिकार दिए गए।
  • कृषि विभाग की स्थापना: भारत में कृषि और वाणिज्य के विकास के लिए एक अलग 'कृषि और वाणिज्य विभाग' (Department of Agriculture and Commerce) स्थापित किया।
  • मेयो कॉलेज (अजमेर): भारतीय राजाओं और नवाबों के बच्चों (राजकुमारों) को अंग्रेजी शिक्षा देने के लिए अजमेर (राजस्थान) में प्रसिद्ध 'मेयो कॉलेज' की स्थापना की।
  • हत्या: ये एकमात्र वायसराय थे जिनकी हत्या उनके कार्यकाल (Office) के दौरान हुई। 1872 में अंडमान (पोर्ट ब्लेयर) के दौरे पर एक अफगानी कैदी 'शेर अली अफरीदी' ने चाकू मारकर इनकी हत्या कर दी।
  • सांख्यिकीय सर्वेक्षण: इन्होंने 'भारतीय सांख्यिकीय सर्वेक्षण' (Statistical Survey of India) का गठन किया ताकि देश के संसाधनों का सही अनुमान लगाया जा सके।

👑 लॉर्ड नॉर्थब्रुक (Lord Northbrook) – 1872–1876

  • कूका विद्रोह (1872): पंजाब का प्रसिद्ध 'कूका विद्रोह' (Kuka Movement) इन्हीं के समय हुआ। इसके नेता बाबा राम सिंह कूका को गिरफ्तार कर रंगून (बर्मा) भेज दिया गया।
  • प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा (1875): ब्रिटेन के राजकुमार 'एडवर्ड सप्तम' (Prince of Wales) का भारत आगमन इन्हीं के कार्यकाल में हुआ। यह किसी ब्रिटिश राजघराने के सदस्य की पहली भारत यात्रा थी।
  • बड़ौदा के गायकवाड़ पर मुकदमा (1875): बड़ौदा के शासक मल्हार राव गायकवाड़ पर ब्रिटिश रेजिडेंट को जहर देकर मारने के प्रयास का आरोप लगा। उन पर ऐतिहासिक मुकदमा चलाया गया और उन्हें गद्दी से हटा दिया गया।
  • आयकर की समाप्ति: जनता में लोकप्रिय होने के लिए इन्होंने 'आयकर' (Income Tax) को समाप्त कर दिया, जिसे कैनिंग ने शुरू किया था।
  • बिहार का अकाल (1873-74): इनके समय बिहार में भयंकर अकाल पड़ा। नॉर्थब्रुक ने बर्मा से चावल आयात कर इस आपदा का कुशलतापूर्वक सामना किया।
  • स्वेज नहर का प्रभाव: इनके समय में स्वेज नहर (Suez Canal) पूरी तरह खुलने से भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार में भारी वृद्धि हुई और आयातित वस्तुओं के दाम कम हुए।
  • इस्तीफा: ब्रिटिश सरकार की अफगानिस्तान नीति (फॉरवर्ड पॉलिसी) से सहमत न होने के कारण इन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 1876 में इस्तीफा दे दिया।

👑 लॉर्ड लिटन (Lord Lytton) – 1876–1880

  • वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878): भारतीय भाषाओं के अखबारों को कुचलने के लिए यह काला कानून लाया गया, जिसे 'मुँह बंद करने वाला कानून' (Gagging Act) कहा गया। इसी के डर से 'अमृत बाज़ार पत्रिका' रातों-रात अंग्रेजी अखबार बन गया।
  • दिल्ली दरबार (1877): जब दक्षिण भारत भीषण अकाल से जूझ रहा था और लोग मर रहे थे, तब लिटन ने दिल्ली में भव्य दरबार आयोजित कर महारानी विक्टोरिया को 'कैसर-ए-हिंद' की उपाधि दी। इसे "जब रोम जल रहा था, नीरो बंसी बजा रहा था" कहा गया।
  • शस्त्र अधिनियम (Arms Act, 1878): इसने भारतीयों के हथियार रखने पर बिना लाइसेंस के रोक लगा दी, जबकि एंग्लो-इंडियंस और यूरोपियों को इससे छूट दी गई। यह स्पष्ट रूप से नस्लीय भेदभाव था।
  • सिविल सेवा आयु में कमी: भारतीयों को सिविल सेवा (ICS) में आने से रोकने के लिए इसने अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दी।
  • ओवन मेरेडिथ: यह एक प्रसिद्ध उपन्यासकार, निबंध लेखक और साहित्यकार भी था। साहित्य जगत में इसे 'ओवन मेरेडिथ' (Owen Meredith) के नाम से जाना जाता था।
  • द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध (1878-80): लिटन की आक्रामक 'फॉरवर्ड पॉलिसी' के कारण यह युद्ध हुआ, जो अंग्रेजों के लिए बहुत महंगा और विनाशकारी साबित हुआ।
  • अलीगढ़ कॉलेज: 1877 में सर सैयद अहमद खान द्वारा स्थापित 'मोहम्मदन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज' (जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बना) की नींव लॉर्ड लिटन ने ही रखी थी।

👑 लॉर्ड रिपन (Lord Ripon) – 1880–1884

  • स्थानीय स्वशासन का जनक: भारत में 'स्थानीय स्वशासन' (Local Self-Government) की शुरुआत 1882 में इन्हीं के द्वारा की गई। इसलिए इन्हें 'स्थानीय स्वशासन का पिता' कहा जाता है।
  • वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट की समाप्ति (1882): इन्होंने लिटन द्वारा लगाए गए प्रेस पर प्रतिबंधों को हटा दिया और भारतीय समाचार पत्रों को पुनः स्वतंत्रता प्रदान की।
  • इल्बर्ट बिल विवाद (1883-84): इन्होंने भारतीय जजों को यूरोपीय लोगों के मुकदमे सुनने का अधिकार देने के लिए 'इल्बर्ट बिल' पेश किया। अंग्रेजों ने इसका भारी विरोध किया (इसे श्वेत विद्रोह कहा गया), जिसके कारण बिल में संशोधन करना पड़ा।
  • प्रथम नियमित जनगणना (1881): वैसे तो पहली जनगणना मेयो के समय हुई थी, लेकिन 1881 से 'नियमित' (हर 10 साल पर होने वाली) जनगणना की शुरुआत रिपन के समय हुई।
  • प्रथम कारखाना अधिनियम (1881): बाल श्रम की स्थिति सुधारने के लिए पहला 'Factory Act' पारित किया गया, जिसमें 7 साल से कम उम्र के बच्चों के काम करने पर रोक लगाई गई।
  • हंटर आयोग (1882): शिक्षा में सुधार, विशेषकर प्राथमिक शिक्षा के विकास के लिए 'सर विलियम हंटर' की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया।
  • उदारवादी दृष्टिकोण: भारतीयों के प्रति इनके अच्छे व्यवहार के कारण पंडित मदन मोहन मालवीय ने कहा था, "रिपन भारतीय वायसरायों में सबसे लोकप्रिय थे।" इन्हें 'सज्जन रिपन' (The Good Viceroy) भी कहा जाता है।

👑 लॉर्ड डफरिन (Lord Dufferin) – 1884–1888

  • कांग्रेस की स्थापना (1885): इनके कार्यकाल की सबसे ऐतिहासिक घटना 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' की स्थापना थी। ए.ओ. ह्यूम ने इसका गठन किया। डफरिन ने कांग्रेस का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि यह "सूक्ष्मदर्शी अल्पसंख्यकों" (Microscopic Minority) की संस्था है।
  • तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध (1885-86): इस युद्ध के बाद बर्मा (म्यांमार) को पूर्ण रूप से जीतकर ब्रिटिश भारत में मिला लिया गया। यह ब्रिटिश साम्राज्य का अंतिम बड़ा क्षेत्रीय विस्तार था।
  • बंगाल काश्तकारी अधिनियम (1885): किसानों को जमींदारों के शोषण से बचाने और उनकी जमीन सुरक्षित करने के लिए 'Bengal Tenancy Act' पारित किया गया।
  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1887): शिक्षा के क्षेत्र में, 1887 में प्रसिद्ध 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय' की स्थापना इन्हीं के कार्यकाल में हुई।
  • लेडी डफरिन फंड: इनकी पत्नी ने भारतीय महिलाओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 'लेडी डफरिन फंड' की स्थापना की थी।
  • ग्वालियर की वापसी: 1886 में इन्होंने सिंधिया को ग्वालियर का किला वापस लौटा दिया और उनसे अच्छे संबंध स्थापित किए।

👑 लॉर्ड लैंसडाउन (Lord Lansdowne) – 1888–1894

  • डूरंड रेखा (1893): भारत और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए 'सर मोर्टिमर डूरंड' की अध्यक्षता में एक आयोग भेजा गया। इसी ने प्रसिद्ध 'डूरंड रेखा' (Durand Line) का निर्धारण किया।
  • भारत परिषद अधिनियम 1892: यह संवैधानिक विकास की दिशा में बड़ा कदम था। इसके द्वारा भारत में पहली बार 'अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली' (Indirect Election) की शुरुआत हुई और भारतीय सदस्यों को बजट पर प्रश्न पूछने का अधिकार मिला।
  • सम्मति आयु अधिनियम (1891): समाज सुधारक बहरामजी मालाबारी के प्रयासों से 'Age of Consent Act' पारित हुआ, जिसमें लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 10 वर्ष से बढ़ाकर 12 वर्ष कर दी गई। (तिलक ने इसे धर्म में हस्तक्षेप बताकर विरोध किया था)।
  • द्वितीय कारखाना अधिनियम (1891): इसमें महिलाओं के काम करने के घंटे (11 घंटे प्रतिदिन) निश्चित किए गए और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी अनिवार्य कर दी गई।
  • मणिपुर विद्रोह (1891): मणिपुर के राजा कुलचंद्र और सेनापति टिकेंद्रजीत ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया, जिसे दबा दिया गया और मणिपुर पर ब्रिटिश नियंत्रण कड़ा हो गया।
  • सिविल सेवा का वर्गीकरण: 1893 में 'एचिसन कमीशन' की सिफारिश पर Civil सेवाओं को तीन भागों—इंपीरियल, प्रोविंशियल (प्रांतीय) और सबऑर्डिनेट (अधीनस्थ) सेवा में विभाजित किया गया।

👑 लॉर्ड एल्गिन II (Lord Elgin II) – 1894–1899

  • भीषण अकाल (1896-97): इनके समय में उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और मध्य प्रदेश में भयंकर अकाल पड़ा। इसकी जाँच के लिए 'सर जेम्स लायल' (Lyall Commission) की अध्यक्षता में अकाल आयोग का गठन किया गया।
  • प्लेग का प्रकोप: 1896 में बंबई (मुंबई) में 'ब्यूबोनिक प्लेग' (Bubonic Plague) फैला, जिससे हजारों लोगों की मृत्यु हुई।
  • रैंड की हत्या (1897): पुणे में प्लेग कमिश्नर रैंड और आयर्स्ट के अत्याचारों से तंग आकर 'चापेकर बंधुओं' (दामोदर और बालकृष्ण) ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। यह भारत में यूरोपियों की 'प्रथम राजनीतिक हत्या' मानी जाती है।
  • प्रसिद्ध कथन: एल्गिन द्वितीय का यह कथन इतिहास में बहुत प्रसिद्ध है: "हमने भारत को तलवार के बल पर जीता है और तलवार के बल पर ही इसे अपने अधीन रखेंगे।"
  • रामकृष्ण मिशन की स्थापना (1897): स्वामी विवेकानंद जी ने इन्हीं के कार्यकाल में बेलूर (कलकत्ता) में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की थी।
  • चित्राल विद्रोह (1895): उत्तर-पश्चिमी सीमा पर चित्राल में हुए विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश सेना भेजी गई थी।

👑 लॉर्ड कर्जन (Lord Curzon) – 1899–1905

  • बंगाल का विभाजन (1905): यह इनके कार्यकाल की सबसे विवादास्पद घटना थी। 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत बंगाल को दो भागों में बांट दिया गया, जिसके विरोध में पूरे देश में 'स्वदेशी आंदोलन' (Swadeshi Movement) भड़क उठा।
  • प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम (1904): भारतीय इतिहास और संस्कृति में रुचि लेते हुए इन्होंने यह कानून पास किया। इसी के तहत 'भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण' (ASI) को पुनर्जीवित किया गया और ताजमहल जैसी ऐतिहासिक इमारतों की मरम्मत करवाई गई।
  • भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम (1904): 'रैले आयोग' (Raleigh Commission) की सिफारिश पर यह एक्ट पास किया गया, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाना और राष्ट्रवाद के प्रसार को रोकना था।
  • पुलिस सुधार (1902): सर एंड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में 'पुलिस आयोग' का गठन किया, जिसकी सिफारिश पर CID (Criminal Investigation Department) की स्थापना हुई।
  • कृषि अनुसंधान संस्थान: भारत में कृषि के वैज्ञानिक विकास के लिए बिहार के 'पूसा' में एक 'कृषि अनुसंधान संस्थान' (Agricultural Research Institute) की स्थापना की।
  • तिब्बत मिशन (1904): रूसी प्रभाव को रोकने के लिए 'यंगहसबैंड' (Younghusband) के नेतृत्व में एक सैन्य अभियान तिब्बत भेजा और वहां ब्रिटिश प्रभाव स्थापित किया।
  • किचनर से विवाद और इस्तीफा: सैन्य प्रशासन में सुधार को लेकर इनका प्रधान सेनापति (Commander-in-Chief) लॉर्ड किचनर से भारी विवाद हो गया, जिसके कारण 1905 में इन्होंने समय से पहले इस्तीफा दे दिया।

👑 लॉर्ड मिंटो II (Lord Minto II) – 1905–1910

  • मुस्लिम लीग की स्थापना (1906): इनके कार्यकाल में आगा खान और ढाका के नवाब सलीमुल्लाह के नेतृत्व में ढाका में 'मुस्लिम लीग' की स्थापना हुई। अंग्रेजों ने इसे कांग्रेस के खिलाफ खड़ा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • कांग्रेस का सूरत विभाजन (1907): सूरत अधिवेशन में कांग्रेस दो गुटों—'गरम दल' (Extremists) और 'नरम दल' (Moderates) में बंट गई। रास बिहारी घोष इस अधिवेशन के अध्यक्ष थे।
  • मार्ले-मिंटो सुधार (1909): इसे 'भारतीय परिषद अधिनियम 1909' भी कहते हैं। इसके द्वारा मुसलमानों के लिए 'पृथक निर्वाचन मंडल' (Separate Electorate) की व्यवस्था की गई। मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक' (Father of Communal Electorate) कहा जाता है।
  • खुदीराम बोस को फाँसी (1908): मुजफ्फरपुर बम कांड (किंग्सफोर्ड की हत्या की कोशिश) के आरोप में खुदीराम बोस को 18 साल की उम्र में फाँसी दी गई।
  • बाल गंगाधर तिलक को सजा (1908): राजद्रोह के आरोप में तिलक को 6 साल की सजा सुनाकर मांडले जेल (बर्मा) भेज दिया गया।
  • समाचार पत्र अधिनियम (1908): स्वदेशी आंदोलन को दबाने के लिए प्रेस पर कड़े नियंत्रण लगाने हेतु 'Newspapers (Incitement to Offences) Act' पारित किया गया।

👑 लॉर्ड हार्डिंग II (Lord Hardinge II) – 1910–1916

  • दिल्ली दरबार (1911): ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी के स्वागत में भव्य दिल्ली दरबार का आयोजन किया गया। यह एकमात्र दरबार था जिसमें ब्रिटिश सम्राट स्वयं भारत आए थे।
  • बंगाल विभाजन रद्द: 1911 के दरबार में ही 1905 में किए गए 'बंगाल विभाजन' को रद्द करने की ऐतिहासिक घोषणा की गई।
  • राजधानी परिवर्तन (1912): भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा 1911 में हुई और 1912 में दिल्ली भारत की नई राजधानी बनी।
  • हार्डिंग बम कांड (1912): जब हार्डिंग दिल्ली में प्रवेश कर रहे थे, तब चांदनी चौक में उनके हाथी पर बम फेंका गया। इस षड्यंत्र के पीछे रास बिहारी बोस का हाथ था।
  • प्रथम विश्व युद्ध (1914): इनके कार्यकाल में ही 1914 में प्रथम विश्व युद्ध (First World War) की शुरुआत हुई, जिसमें भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों का सहयोग किया।
  • गांधीजी का आगमन (1915): 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से हमेशा के लिए भारत लौटे। (इसी याद में हम 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाते हैं)।
  • BHU की स्थापना (1916): पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से 1916 में 'बनारस हिंदू विश्वविद्यालय' (BHU) की स्थापना हुई और हार्डिंग इसके कुलाधिपति (Chancellor) बने।

👑 लॉर्ड चेम्सफोर्ड (Lord Chelmsford) – 1916–1921

  • रौलेट एक्ट (1919): इसे 'काला कानून' कहा गया, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को केवल शक के आधार पर बिना मुकदमा चलाए जेल में डाला जा सकता था। इसे 'बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील' का कानून कहा गया।
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): रौलेट एक्ट के विरोध में अमृतसर में हो रही शांतिपूर्ण सभा पर जनरल डायर ने अंधाधुंध गोलियां चलवाईं। यह ब्रिटिश शासन के माथे पर सबसे बड़ा कलंक था। इसके विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने 'नाइटहुड' की उपाधि लौटा दी।
  • मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919): 'भारत शासन अधिनियम 1919' पारित हुआ, जिसके द्वारा प्रांतों में 'द्वैध शासन' (Dyarchy) प्रणाली लागू की गई।
  • असहयोग एवं खिलाफत आंदोलन (1920): महात्मा गांधी ने अपना पहला अखिल भारतीय जन-आंदोलन 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) इसी समय शुरू किया।
  • चंपारण सत्याग्रह (1917): गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह बिहार के चंपारण में हुआ, जो नील की खेती (तीनकठिया प्रथा) के विरुद्ध था।
  • लखनऊ समझौता (1916): कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ। साथ ही, कांग्रेस के गरम दल और नरम दल फिर से एक हो गए।
  • सैडलर आयोग (1917): कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं के अध्ययन के लिए 'सैडलर आयोग' (Saddler Commission) का गठन किया गया।
  • महिला विश्वविद्यालय (1916): समाज सुधारक डी.के. कर्वे के प्रयासों से पुणे में भारत का पहला 'महिला विश्वविद्यालय' स्थापित हुआ।

👑 लॉर्ड रीडिंग (Lord Reading) – 1921–1926

  • चौरी-चौरा कांड (1922): 5 फरवरी 1922 को गोरखपुर (UP) में उग्र भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी, जिससे 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए। इस हिंसा से दुखी होकर गांधीजी ने 'असहयोग आंदोलन' वापस ले लिया।
  • स्वराज पार्टी की स्थापना (1923): गया अधिवेशन के बाद, चितरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' का गठन किया।
  • काकोरी ट्रेन एक्शन (1925): हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के क्रांतिकारियों (राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिरी) ने सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को काकोरी में लूटा।
  • मोपला विद्रोह (1921): केरल के मालाबार तट पर मुस्लिम किसानों (मोपला) द्वारा किया गया विद्रोह इन्हीं के कार्यकाल की शुरुआत में हुआ था।
  • ICS परीक्षा की शुरुआत: 1923 से भारतीय सिविल सेवा (ICS) की परीक्षा लंदन और दिल्ली (भारत) में एक साथ आयोजित की जाने लगी। इससे पहले यह केवल लंदन में होती थी।
  • एकमात्र यहूदी वायसराय: लॉर्ड रीडिंग भारत के एकमात्र 'यहूदी' (Jewish) धर्म को मानने वाले वायसराय थे।
  • रौलेट एक्ट की समाप्ति: इन्होंने भारतीयों की मांग पर कुख्यात 'रौलेट एक्ट' और 1910 के प्रेस एक्ट को रद्द कर दिया।
  • RSS की स्थापना (1925): केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा नागपुर में 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' (RSS) की स्थापना इन्हीं के समय हुई।

👑 लॉर्ड इरविन (Lord Irwin) – 1926–1931

  • साइमन कमीशन (1928): 3 फरवरी 1928 को 'साइमन कमीशन' बंबई पहुंचा। चूँकि इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, इसलिए इसका भारी विरोध हुआ। इसी विरोध प्रदर्शन (लाहौर) के दौरान लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई।
  • पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव (1929): कांग्रेस के ऐतिहासिक 'लाहौर अधिवेशन' (अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू) में पहली बार 'पूर्ण स्वराज' का लक्ष्य घोषित किया गया। 26 जनवरी 1930 को पहला 'स्वतंत्रता दिवस' मनाया गया।
  • दांडी मार्च (1930): 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी तक ऐतिहासिक यात्रा की और 6 अप्रैल को नमक कानून तोड़कर 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) की शुरुआत की।
  • गांधी-इरविन समझौता (1931): 5 मार्च 1931 को गांधीजी और इरविन के बीच एक समझौता हुआ, जिसे 'दिल्ली समझौता' भी कहा जाता है। इसके बाद कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित कर दिया और दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने पर सहमति दी।
  • शारदा अधिनियम (1929): समाज सुधार की दिशा में 'शारदा एक्ट' पारित किया गया, जिसमें विवाह की न्यूनतम आयु लड़कों के लिए 18 वर्ष और लड़कियों के लिए 14 वर्ष निर्धारित की गई।
  • असेंबली बम कांड (1929): भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने पब्लिक सेफ्टी बिल के विरोध में दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका।
  • जतिन दास की शहादत (1929): जेल में भारतीय कैदियों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ 64 दिनों की लंबी भूख हड़ताल के बाद क्रांतिकारी जतिन दास की मृत्यु हो गई।
  • दीपावली घोषणा (1929): इरविन ने घोषणा की कि भारत की संवैधानिक प्रगति का लक्ष्य 'डोमिनियन स्टेट' (Dominion Status) का दर्जा प्राप्त करना है।

👑 लॉर्ड विलिंगडन (Lord Willingdon) – 1931–1936

  • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931): गांधीजी कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में लंदन गए, लेकिन सांप्रदायिक मुद्दे पर बात नहीं बनी और सम्मेलन असफल रहा। गांधीजी ने लौटकर कहा, "मैं खाली हाथ लौटा हूँ, लेकिन मैंने अपने देश की इज्जत को बट्टा नहीं लगने दिया।"
  • पूना पैक्ट (1932): जब ब्रिटिश पीएम रामसे मैकडोनाल्ड ने दलितों के लिए 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) की घोषणा की, तो गांधीजी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू कर दिया। अंततः गांधीजी और डॉ. अंबेडकर के बीच ऐतिहासिक 'पूना समझौता' हुआ।
  • भारत शासन अधिनियम 1935: यह ब्रिटिश शासन द्वारा भारत में लाया गया अंतिम और सबसे बड़ा संवैधानिक सुधार था। भारतीय संविधान का एक बड़ा हिस्सा इसी अधिनियम से लिया गया है।
  • तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932): यह सम्मेलन भी बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया। कांग्रेस ने इसमें भाग नहीं लिया था।
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन (दूसरा चरण): लंदन से लौटने के बाद गांधीजी ने 1932 में दोबारा आंदोलन शुरू किया, लेकिन विलिंगडन ने दमनकारी नीति अपनाई और गांधीजी सहित सभी बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया।
  • कांग्रेस समाजवादी पार्टी (1934): आचार्य नरेंद्र देव और जयप्रकाश नारायण ने कांग्रेस के भीतर ही समाजवादी विचारधारा को बढ़ाने के लिए 'Congress Socialist Party' की स्थापना की।
  • बर्मा का अलग होना (1935): 1935 के अधिनियम के तहत बर्मा (म्यांमार) को भारत से अलग कर दिया गया।
  • बिहार भूकंप (1934): 1934 में बिहार में अब तक का सबसे विनाशकारी भूकंप आया, जिससे भारी तबाही हुई।

👑 लॉर्ड लिनलिथगो (Lord Linlithgow) – 1936–1943

  • सबसे लंबा कार्यकाल: भारत के सभी वायसरायों में इनका कार्यकाल सबसे लंबा (लगभग 7.5 वर्ष) रहा।
  • प्रथम आम चुनाव (1936-37): 1935 के अधिनियम के तहत पहली बार चुनाव हुए। कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और 11 में से 8 प्रांतों में अपनी सरकार बनाई।
  • द्वितीय विश्व युद्ध (1939): लिनलिथगो ने भारतीय नेताओं की सहमति के बिना भारत को युद्ध में झोंक दिया। इसके विरोध में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। मुस्लिम लीग ने इसे 'मुक्ति दिवस' (Day of Deliverance) के रूप में मनाया।
  • अगस्त प्रस्ताव (1940): युद्ध में भारतीयों का सहयोग पाने के लिए 'अगस्त प्रस्ताव' (August Offer) पेश किया गया, जिसे कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने अस्वीकार कर दिया।
  • क्रिप्स मिशन (1942): स्टैफोर्ड क्रिप्स भारत आए। गांधीजी ने उनके प्रस्तावों को "दिवालिया हो रहे बैंक का उत्तर दिनांकित चेक" (Post-dated cheque) कहकर खारिज कर दिया।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 8 अगस्त 1942 को गांधीजी ने 'करो या मरो' का नारा दिया और ऐतिहासिक 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) शुरू हुआ। अंग्रेजों ने 'ऑपरेशन जीरो ऑवर' चलाकर सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
  • बंगाल का अकाल (1943): इनके कार्यकाल के अंत में बंगाल में मानव इतिहास का एक भीषण अकाल पड़ा, जिसमें लगभग 30 लाख लोगों की मृत्यु हुई।

👑 लॉर्ड वेवेल (Lord Wavell) – 1943–1947

  • शिमला सम्मेलन (1945): संवैधानिक गतिरोध को दूर करने के लिए वेवेल ने सभी दलों का एक सम्मेलन शिमला में बुलाया। लेकिन जिन्ना की जिद के कारण यह सम्मेलन विफल हो गया।
  • नौसेना विद्रोह (1946): 18 फरवरी 1946 को बंबई में 'आई.एन.एस. तलवार' (INS Talwar) जहाज के भारतीय सैनिकों ने खराब भोजन और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ विद्रोह कर दिया।
  • कैबिनेट मिशन (1946): भारत में संविधान निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तीन सदस्यीय मिशन भारत आया। इसी के प्रस्ताव पर संविधान सभा का गठन हुआ।
  • प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (16 अगस्त 1946): मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग के लिए 'Direct Action Day' का आह्वान किया, जिससे कलकत्ता में भीषण सांप्रदायिक दंगे हुए।
  • अंतरिम सरकार (1946): 2 सितंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत की पहली 'अंतरिम सरकार' का गठन हुआ।
  • संविधान सभा की पहली बैठक: 9 दिसंबर 1946 को दिल्ली में संविधान सभा की प्रथम बैठक आयोजित की गई।
  • एटली की घोषणा (1947): ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने घोषणा की कि अंग्रेज जून 1948 से पहले सत्ता भारतीयों को सौंपकर भारत छोड़ देंगे।

🇮🇳 स्वतंत्र भारत के गवर्नर जनरल (1947–1950)

✨ लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten) – 1947–1948

  • अंतिम वायसराय और प्रथम गवर्नर जनरल: ये ब्रिटिश भारत के 'अंतिम वायसराय' थे। 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद ये 'स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल' बने।
  • माउंटबेटन योजना (3 जून योजना): 3 जून 1947 को इन्होंने भारत के विभाजन की योजना प्रस्तुत की, जिसे 'माउंटबेटन योजना' या 'बालकन प्लान' कहा जाता है। इसी के आधार पर भारत और पाकिस्तान दो अलग देश बने।
  • भारत की स्वतंत्रता (15 अगस्त 1947): इन्होंने ही 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को भारत को सत्ता हस्तांतरित (Transfer of Power) की।
  • रेडक्लिफ रेखा: भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारण के लिए 'सर सिरिल रेडक्लिफ' की अध्यक्षता में दो सीमा आयोग गठित किए गए।
  • कश्मीर का विलय (1947): राजा हरि सिंह द्वारा हस्ताक्षरित 'विलय पत्र' (Instrument of Accession) को माउंटबेटन ने ही स्वीकार किया था।
  • गांधीजी की हत्या (1948): महात्मा गांधी की हत्या (30 जनवरी 1948) इन्हीं के कार्यकाल के दौरान हुई थी।

✨ सी. राजगोपालाचारी (C. Rajagopalachari) – 1948–1950

  • प्रथम और अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल: लॉर्ड माउंटबेटन के जाने के बाद, 'राजाजी' स्वतंत्र भारत के पहले और एकमात्र भारतीय व्यक्ति बने जिन्हें गवर्नर जनरल का पद सौंपा गया।
  • पद की समाप्ति: 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के साथ ही भारत एक 'गणतंत्र' (Republic) बन गया और गवर्नर जनरल का पद हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया।
  • सत्ता का हस्तांतरण: इन्होंने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को विधिवत रूप से सत्ता सौंपी और स्वयं पदमुक्त हुए।
  • भारत रत्न (1954): 1954 में जब भारत रत्न की शुरुआत हुई, तो इसे पाने वाले पहले तीन व्यक्तियों में राजाजी भी शामिल थे।
  • हैदराबाद का विलय (1948): इनके कार्यकाल में ही 'ऑपरेशन पोलो' के तहत हैदराबाद रियासत का भारत में सफल विलय हुआ।
  • कुशल राजनीतिज्ञ: प्रखर बुद्धिजीवी और गांधीजी के करीबी होने के कारण इन्हें भारतीय राजनीति का 'चाणक्य' भी कहा जाता था।

👉 सी. राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के एकमात्र भारतीय गवर्नर जनरल थे।
👉 26 जनवरी 1950 को भारत गणराज्य बना और गवर्नर जनरल का पद समाप्त हो गया।

भारत की प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ

Q. बंगाल के प्रथम गवर्नर जनरल कौन थे?

वॉरेन हेस्टिंग्स (Warren Hastings) को 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत बंगाल का प्रथम गवर्नर जनरल बनाया गया था।

Q. भारत के प्रथम वायसराय (Viceroy) कौन थे?

लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning) भारत के पहले वायसराय थे। 1858 के अधिनियम के बाद गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर 'वायसराय' कर दिया गया था।

Q. स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल कौन थे?

लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten) स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल थे। (जबकि सी. राजगोपालाचारी 'प्रथम भारतीय' थे)।

Q. भारत में सिविल सेवा (Civil Services) का जनक किसे माना जाता है?

लॉर्ड कॉर्नवालिस को भारत में 'सिविल सेवा' और 'पुलिस व्यवस्था' का जनक माना जाता है।

Q. भारत में स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) का पिता किसे कहा जाता है?

लॉर्ड रिपन को उनके उदारवादी सुधारों के कारण 'स्थानीय स्वशासन का जनक' कहा जाता है।

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